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Latest NewsNai aawazधरमजयगढ

चुनावी वादों की चमक फीकी, अब ग्रामीणों के भरोसे गांव की सड़क..!

Nai Aawaz
Last updated: November 4, 2026 8:33 am
Nai Aawaz
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7 Min Read
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नकनापारा, पटेलपानी और खुरनूपानी के ग्रामीणों ने खुद संभाली सड़क मरम्मत की कमान, चंदा जुटाकर जेसीबी-ट्रैक्टर से कर रहे रास्ते का सुधार; सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल…

Contents
धान खरीदी से पहले रास्ते की चिंता, टूटे पुलिया ने बढ़ाई परेशानी…पंचायत अधिनियम में निहित हैं,जवाबदेही और विकास के दायित्व..अब सवाल प्रशासन से भी…

धरमजयगढ़@naiaawaz। लोकतंत्र में चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों, विश्वास और विकास के संकल्प का आधार भी होता है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादों और विकास के दावों के साथ मतदाताओं के दरवाजे तक पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि, जीत के बाद यदि उन्हीं मतदाताओं की बुनियादी समस्याओं से मुंह फेर लें, तो यह केवल प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि जनविश्वास के साथ अन्याय भी है। बता दें,धरमजयगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत कूमा से सामने आया एक ऐसा ही दृश्य ग्रामीण विकास व्यवस्था और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

वहीं ग्राम पंचायत कूमा के नकनापारा, पटेलपानी और खुरनूपानी के ग्रामीण इन दिनों उस रास्ते की मरम्मत स्वयं करने को मजबूर हैं, जिसके रखरखाव और सुधार की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की व्यवस्था से जुड़ी है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्रित किया और जेसीबी एवं ट्रैक्टर की मदद से पंचायत तक पहुंचने वाले जर्जर मार्ग को सुधारने का बीड़ा उठा लिया। विडंबना देखिए कि जिस सड़क के लिए ग्रामीणों को पंचायत के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, उसी सड़क को अब वे अपने संसाधनों से दुरुस्त करने में जुटे हैं। वहीं आगे ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर सरपंच और सचिव से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, मोहल्ले की समस्याएं सुनने और उनका जायजा लेने तक जनप्रतिनिधियों ने नियमित रूप से पहुंचने की जहमत नहीं उठाई। उनका कहना है कि पूर्ववर्ती सरपंच-सचिव कम से कम सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करते थे, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। आगे ग्रामीणों ने वर्तमान सरपंच मानती राठिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वे स्वयं मोहल्ले में नहीं पहुंचतीं और कई बार सरपंच के स्थान पर उनके पति सुरेश राठिया पहुंचते हैं। और स्वयं को सरपंच बताते हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सचिव सुशील तिर्की से भी समस्या बताने पर भी उन्हें संतोषजनक आश्वासन नहीं मिल पाता। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत सचिव का पक्ष सामने आना शेष है।

धान खरीदी से पहले रास्ते की चिंता, टूटे पुलिया ने बढ़ाई परेशानी…

वहीं ग्रामीणों के मुताबिक, आगामी 15 नवंबर से धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में जर्जर सड़क और टूटी हुई छोटी पुलिया उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। किसानों को अपनी उपज लेकर आवागमन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। बरसात के बाद भी मार्ग की स्थिति सुधारने की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं होने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। आखिरकार ग्रामीणों ने स्वयं चंदा जुटाकर सड़क मरम्मत का काम शुरू कर दिया। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि मरम्मत कार्य के दौरान सरपंच पति सुरेश राठिया, पंचायत सचिव सुशील तिर्की और क्षेत्रीय जनपद सदस्य (बीडीसी) मदन राठिया मौके पर देखने के लिए पहुंचे थे। और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल मौके पर पहुंचकर देखने करने तक सीमित रह गई है।

पंचायत अधिनियम में निहित हैं,जवाबदेही और विकास के दायित्व..

बता दें, छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत ग्राम पंचायत को स्थानीय विकास, सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव तथा ग्रामीण आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं ग्राम सभा को पंचायत के कार्यों, विकास योजनाओं और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग पर निगरानी एवं सवाल उठाने का लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में ग्रामीणों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए स्वयं चंदा जुटाकर मरम्मत करने की नौबत आना पंचायत की प्राथमिकताओं, उपलब्ध बजट और कार्ययोजना की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह भी जांच का विषय है कि संबंधित मार्ग के सुधार अथवा पुलिया मरम्मत के लिए पंचायत के पास उपलब्ध 15वें वित्त आयोग, अन्य मदों या विकास योजनाओं के अंतर्गत कोई प्रावधान अथवा प्रस्ताव था या नहीं। यदि राशि उपलब्ध थी, तो उसका उपयोग क्यों नहीं हुआ? और यदि राशि उपलब्ध नहीं थी, तो ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए उच्च अधिकारियों से मांग अथवा प्रस्ताव भेजने की पहल की गई या नहीं?

एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि निर्वाचित महिला सरपंच के स्थान पर उनके पति की भूमिका किस सीमा तक है? पंचायत का विधिक दायित्व निर्वाचित सरपंच का है। पति अथवा किसी अन्य परिजन द्वारा सरपंच के वैधानिक अधिकारों और दायित्वों का स्थानापन्न बनना उचित नहीं है। पंचायत के कार्यों में निर्वाचित प्रतिनिधि की जवाबदेही और विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

अब सवाल प्रशासन से भी…

कूमा पंचायत के नकनापारा, पटेलपानी और खुरनूपानी के ग्रामीणों की यह तस्वीर केवल एक जर्जर सड़क की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की जमीनी हकीकत का आईना है। जब ग्रामीण अपने ही गांव की सड़क बनाने के लिए चंदा जुटाने को मजबूर हों, तो पंचायत व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब देखना यह होगा कि जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या सड़क एवं टूटी पुलिया की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण होगा? क्या पंचायत के उपलब्ध बजट, प्रस्तावों और व्यय की समीक्षा की जाएगी? और क्या ग्रामीणों को आवागमन की बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी? जनता ने जनप्रतिनिधियों को विकास की जिम्मेदारी सौंपी है, न कि समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें बार-बार गुहार लगाने की विवशता। लोकतंत्र में कुर्सी सम्मान का प्रतीक तभी है, जब उसके साथ जवाबदेही भी निभाई जाए। वरना ग्रामीणों के हाथों में फावड़ा और चंदे की रसीदें, पंचायत व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ी रहेंगी।

YouTube Video VVVkczJNMGQ2RldFcWFEN05Ud3BWVnJnLjM4Rzk4eHN4ZnlZ 🛟धरमजयगढ़ के कोयलर क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 9 बजे बस और ट्रक की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

जानकारी के अनुसार, बस धरमजयगढ़ से खरसिया की ओर जा रही थी और उसमें करीब 40 से 50 यात्री सवार थे। दुर्घटना में कई यात्रियों के घायल होने तथा बस चालक के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

कोयलर क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों के बीच यह दुर्घटना सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

पूरी खबर के लिए वीडियो देखें और जुड़े रहें — नई आवाज (NAIAAWAZ.COM)
🛟 समाचार में अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें!!
🛟धरमजयगढ़ के कोयलर क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 9 बजे बस और ट्रक की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

जानकारी के अनुसार, बस धरमजयगढ़ से खरसिया की ओर जा रही थी और उसमें करीब 40 से 50 यात्री सवार थे। दुर्घटना में कई यात्रियों के घायल होने तथा बस चालक के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

कोयलर क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों के बीच यह दुर्घटना सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

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