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धरमजयगढ़ मांड नदी जलविद्युत परियोजना पर दायर जनहित याचिका खारिज, उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी— “अखबारी खबरें नहीं, ठोस साक्ष्य चाहिए!

Nai Aawaz
Last updated: July 24, 2026 11:14 am
Nai Aawaz
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7 Min Read
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बिलासपुर/धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में मांड नदी पर स्थापित 7.5 मेगावाट जलविद्युत परियोजना के विरुद्ध दायर जनहित याचिका को पूर्णतः निराधार, साक्ष्यविहीन एवं गुण-दोष से रहित मानते हुए खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि केवल समाचार-पत्रों में प्रकाशित खबरों अथवा अपुष्ट आरोपों के आधार पर जनहित याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। न्यायालय ने याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई प्रतिभूति (जमानत) राशि को भी राजसात करने का आदेश पारित किया। वहीं यह निर्णय WPPIL No. 33 of 2026 (विवेक कुमार पांडेय बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य) प्रकरण में सुनाया गया, जिसमें मांड नदी जलविद्युत परियोजना के निर्माण को चुनौती दी गई थी।

Contents
क्या था पूरा मामला..!संयुक्त जांच में आरोप नहीं हुए, साबित!उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी…याचिका गुण-दोष से रहित, जमानत राशि भी जब्त..कंपनी प्रबंधन एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार..

क्या था पूरा मामला..!

उच्च न्यायालय के दस्तावेज अनुसार बता दें, धरमजयगढ़ निवासी पत्रकार एवं याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि मैसर्स धनवाड़ा पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा धरमजयगढ़़ क्षेत्र के ग्राम भालूपाखना के खसरा क्रमांक 347 एवं 365 स्थित शासकीय वन भूमि पर वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 के अंतर्गत आवश्यक पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना निर्माण कार्य एवं अन्य गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। याचिका में परियोजना पर तत्काल रोक लगाने, यथास्थिति बनाए रखने तथा स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की गई थी।

संयुक्त जांच में आरोप नहीं हुए, साबित!

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन, राजस्व विभाग एवं वन विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से विस्तृत स्थल निरीक्षण कराया गया। जांच के दौरान 23 मार्च 2026 तथा 20 जून 2026 को ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचनामे तैयार किए गए।वहीं प्रशासन द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत जांच प्रतिवेदनों के अनुसार संबंधित खसरा भूमि पर न तो किसी प्रकार का पावर हाउस,पेनस्टॉक अथवा स्विचयार्ड निर्मित पाया गया और न ही वृक्षों की अवैध कटाई के कोई प्रमाण मिले। तहसीलदार एवं राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि को ‘बड़े झाड़ के जंगल एवं निस्तार प्रयोजन हेतु आरक्षित राजस्व भूमि बताया गया, न कि अधिसूचित वन भूमि। साथ ही यह भी अभिलेखों में दर्शाया गया कि परियोजना के लिए कंपनी ने सक्षम प्राधिकारियों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) एवं अन्य विधिक स्वीकृतियां प्राप्त की थीं।

उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी…

बता दें, अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाचार-पत्रों में प्रकाशित समाचार स्वयं किसी विधिक निष्कर्ष अथवा न्यायिक राहत का आधार नहीं बन सकते। और वहीं जनहित याचिका का उद्देश्य जनसामान्य के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि बिना ठोस साक्ष्यों के विकास कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करना। और न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘स्टेट ऑफ उत्तरांचल बनाम बलवंत सिंह चौफाल’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जनहित याचिका स्वीकार करने से पूर्व न्यायालय को याचिकाकर्ता की नीयत तथा प्रस्तुत तथ्यों की विश्वसनीयता से संतुष्ट होना आवश्यक है।

याचिका गुण-दोष से रहित, जमानत राशि भी जब्त..

और वहीं मामले में युगलपीठ ने अपने अंतिम निष्कर्ष में कहा कि याचिकाकर्ता प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्टों को अविश्वसनीय अथवा दुर्भावनापूर्ण सिद्ध करने में पूर्णतः असफल रहा। जब सक्षम प्रशासनिक एवं विशेषज्ञ संस्थाएं बार-बार स्थल निरीक्षण कर तथ्य स्पष्ट कर चुकी हैं, तब संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत न्यायालय के हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता। और इसी आधार पर न्यायालय ने जनहित याचिका को पूर्णतः खारिज करते हुए याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई प्रतिभूति (जमानत) राशि को राजसात करने का आदेश पारित किया। और वहीं न्यायालय ने अपने निर्णय के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि जनहित याचिका का मंच केवल ठोस तथ्यों, विश्वसनीय साक्ष्यों और वास्तविक जनहित के मामलों के लिए है, निराधार आरोपों अथवा अपुष्ट समाचारों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।

कंपनी प्रबंधन एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार..

और वहीं कंपनी प्रबंधन एवं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार, तथ्यविहीन एवं वास्तविकता से परे थे। अधिकारियों के अनुसार, इन आरोपों के कारण न केवल परियोजना से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अनावश्यक मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, बल्कि विभिन्न विभागों को बार-बार स्थल निरीक्षण, जांच और प्रतिवेदन तैयार करने में अपना बहुमूल्य समय एवं संसाधन भी व्यय करने पड़े। उनका कहना है कि अंततः उच्च न्यायालय के निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रस्तुत आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि निराधार आरोपों के आधार पर विकास परियोजनाओं को विवादों में घसीटने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और जनहित के महत्वपूर्ण कार्यों की गति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।वहीं, कंपनी प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी की कथित संलिप्तता एवं बाहरी व्यक्तियों के साथ सांठगांठ की भूमिका रही, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना के संबंध में निराधार आरोपों को विभिन्न मंचों पर प्रस्तुत किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इन आरोपों के कारण न केवल प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार जांच एवं स्पष्टीकरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, बल्कि कंपनी की कार्यप्रणाली भी अनावश्यक रूप से प्रभावित हुई। और आगे कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकरण से कंपनी को करोड़ों रुपये की प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष आर्थिक क्षति उठानी पड़ी, साथ ही परियोजना की प्रतिष्ठा और कार्य निष्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

हालांकि, इस संबंध में कंपनी प्रबंधन भविष्य में कोई विधिक अथवा अन्य कार्रवाई करेगा अथवा नहीं, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। आने वाले समय में कंपनी प्रबंधन की रणनीति और रुख स्पष्ट होने की संभावना है।

YouTube Video VVVkczJNMGQ2RldFcWFEN05Ud3BWVnJnLjM4Rzk4eHN4ZnlZ 🛟धरमजयगढ़ के कोयलर क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 9 बजे बस और ट्रक की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

जानकारी के अनुसार, बस धरमजयगढ़ से खरसिया की ओर जा रही थी और उसमें करीब 40 से 50 यात्री सवार थे। दुर्घटना में कई यात्रियों के घायल होने तथा बस चालक के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

कोयलर क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों के बीच यह दुर्घटना सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

पूरी खबर के लिए वीडियो देखें और जुड़े रहें — नई आवाज (NAIAAWAZ.COM)
🛟 समाचार में अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें!!
🛟धरमजयगढ़ के कोयलर क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 9 बजे बस और ट्रक की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

जानकारी के अनुसार, बस धरमजयगढ़ से खरसिया की ओर जा रही थी और उसमें करीब 40 से 50 यात्री सवार थे। दुर्घटना में कई यात्रियों के घायल होने तथा बस चालक के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

कोयलर क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों के बीच यह दुर्घटना सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

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